बस्तर में केवल एक नक्सली कमांडर पापा राव शेष बचा, लाल आतंक की शुरू हो गई उल्टी गिनती

जगदलपुर।  बस्तर से लेकर तेलंगाना तक दशकों से विस्तारित लाल आतंक के माओवादी नेटवर्क की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और माओवादी नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। शनिवार को तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख हुंगा मड़कम ऊर्फ पंचुगा एवं आयती मुचाकी ऊर्फ जोगी के मारे जाने के बाद बस्तर में नक्सली संगठन पूरी तरह से नेतृत्वविहीन हो गया है। बस्तर में अब केवल एक नक्सली कमांडर पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों काे विश्वास है, कि जल्द ही बस्तर काे नक्सलमुक्त हाेने की घोषणा कर दी जाए।

 

गाैरतलब है कि बस्तर मूल के नक्सली कमांडर रहे बारसे देवा ने शनिवार को हैदाराबाद के डीजीपी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। उसके आत्मसमर्पण के बाद अब कई तरह की चर्चाएं तेज हैं, इन्हीं चर्चाओं के बीच इस बात को भी बल मिल रहा है, कि बस्तर समेत समूचे छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करने से बड़े नक्सल कैडर बच रहे हैं । उन्हें डर है कि कहीं उनका यहां एनकाउंटर ना कर दिया। जाए। पिछले साल जगदलपुर में सीसी मेंबर रूपेश ने आत्मसमर्पण किया था, इसके अलावा सभी बड़े चेहरों ने छत्तीसगढ़ से बाहर ही आत्मसमर्पण किया है। छत्तीसगढ़ को लेकर बड़े नक्सलियों में अब भी डर है । बचे हुए नक्सली नेताओं में यह आम धारणा बन चुकी है, कि छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबल आत्मसमर्पण से पहले ही मार डालेगी। यही वजह है कि बड़े कैडर वाले नक्सली छत्तीसगढ़ की बजाय तेलंगाना और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों को आत्मसमर्पण के लिए सुरक्षित मानते हैं। एक और बड़ा संकेत यह है कि भाजपा शासित राज्यों में नक्सली सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। हिड़मा को भी भाजपा समर्थित आंध्र सरकार के राज में ही मारा गया । यही कारण है कि बारसे देवा छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण से बच रहा था, आत्मसमर्पण करने की हिम्मत नहीं जुटा सका । उसके लिए बस्तर के जंगलों में ऑपरेशन तक रोके गए, ताकि वह सुरक्षित बाहर आ सके लेकिन इसी बीच वह सीमा पार कर तेलंगाना पहुंच गया और वहां जाकर आत्मसमर्पण कर दिया।

 

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है, और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है । बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा।

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