सुकमा, 18 नवंबर। छत्तीसगढ़ एवं आंध्रप्रदेश की सीमा क्षेत्र में पर इस समय दो अलग-अलग मुठभेड़ चल रही हैं। पहली मुठभेड़ छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश सीमा पर हुई, जिसमें छह नक्सली मारे गए हैं, इसी मुठभेड़ में एक करोड़ के ईनामी नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा एवं हिड़मा की पत्नी राजे भी मारी गई है। उसकी तस्वीर भी सामने आई है। दूसरी मुठभेड़ सुकमा जिले के एर्राबोर थाना क्षेत्र में चल रही है। 18 नवंबर की सुबह हुई इस गोलीबारी में कई नक्सली घायल हुए हैं। सुरक्षा बल अभी भी मौके पर मौजूद हैं और सर्च ऑपरेशन जारी है।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र से एक बेहद अहम सूचना सामने आ रही है।आधिकारिक पुष्टि और औपचारिक घोषणा की प्रतीक्षा है, पर शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह कदम वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन में देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन सकता है।
पुलिस को सूचना मिली थी की एर्राबोर के जंगल में बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इसी सूचना के आधार पर रात में डीआरजी के जवानों को मौके के लिए रवाना किया गया था। वहीं आज सुबह पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। इसके बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला और नक्सलियों की गोलियों का जवाब दिया। फिलहाल सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 1 करोड़ का इनामी माड़वी हिड़मा सुकमा के पूवर्ती गांव का निवासी था। वह बचपन से ही नक्सल संगठन में चला गया था। इसकी बनाई हुई योजना से नक्सल संगठन को बड़ी सफलताएं भी मिली थी। पहले एरिया कमेटी, DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर) और फिर DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) कैडर में रहा। नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 का कमांडर भी था।
बस्तर में खौफ औऱ आतंक का दूसरा नाम था हिड़मा
छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब तक हुई तमाम बड़ी नक्सल वारदातें हिडमा की ही साजिश बताई जाती हैं। सुकमा के भेज्जी में हुए नक्सल हमले के पीछे भी हिडमा का ही हाथ रहा, इस हमले में सीआऱपीएफ के 12 जवान शहीद हुए थे। साल 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले में हुए हमले के पीछे भी हिडमा शामिल था, इस हमले में कांग्रेस नेताओं समेत 30 लोगों की हत्या कर दी गई थी. 2010 में चिंतलनार के करीब ताड़मेटला में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत के पीछे भी हिडमा का ही शातिर दिमाग काम करता रहा। सुरक्षा एजेंसियां जानती थीं कि वो फिलहाल बस्तर में सक्रिय है, लेकिन उसके ठिकाने की सही-सही जानकारी किसी को नहीं मिल रही थी। इसकी एक वजह इस इलाके का उड़ीसा और आंध्र प्रदेश की सीमा के नजदीक होना है. इससे नक्सली हमलों को अंजाम देने के बाद आसानी से दूसरे राज्यों में जाकर छिप जाते हैं। हिडमा के बारे में ये भी कहा जाता है कि बस्तर का वो इकलौता आदिवासी नक्सल लड़ाका है, जो नक्सलियों की मिलिट्री बटालियन को लीड करता है।

