नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के चीन में ही हुए समिट में चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी कोई भी कनेक्टिविटी अपना अर्थ और भरोसा खो देती है, जब किसी देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर CPEC का नाम नहीं लिया, लेकिन पीएम मोदी की बात से संकेत उसे लेकर ही माना गया। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि संप्रभुता और एकात्मता का सम्मान करना चाहिए किसी भी कनेक्टिविटी के प्रयास में इसका ख्याल करना चाहिए।
उनकी स्पीच को CPEC से ही इसलिए जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि चीन के शिनजियांग से पाकिस्तान के ग्वादर तक बना यह कॉरिडोर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक हिस्से से होकर गुजरता है। यह क्षेत्र आधिकारिक तौर पर भारतीय क्षेत्र है, जिस पर 1947-48 में कबायली हमले के दौरान पाकिस्तान ने अवैध कब्जा जमा लिया था। भारत इसे अपना क्षेत्र मानता है, ऐसे में यहां से CPEC के गुजरने को संप्रभुता के खिलाफ माना गया है। यही नहीं इसी दलील पर भारत ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने से इनकार कर दिया था।
एससीओ समिट में समीकरण भी बदलते हुए दिखे हैं। एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त और साझा नीति की अपील की तो वहीं दूसरी तरफ समिट के घोषणा पत्र में भी इसे शामिल किया गया है। इसमें पहलगाम हमले की तीखी निंदा की गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं उन सभी मित्र देशों का धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने पहलगाम हमले का विरोध किया और हमारे साथ मुश्किल वक्त में खड़े रहे। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को लेकर तीखा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा, ‘एक स्वाभाविक समाल है कि क्या हमें यह स्वीकार होगा कि कुछ देश खुलकर आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं।’
चीन को उसकी धरती से ही PM मोदी का सख्त संदेश?

