इस्लामाबाद.ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद दावा किया जा रहा है कि वहां रेडिएशन लीक हो रहा है। अब इन अफवाहों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की सफाई आई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान के किसी भी परमाणु केंद्र से रेडिएशन रिसाव या उत्सर्जन की कोई घटना नहीं हुई है।
IAEA के प्रेस विभाग के फ्रेडरिक डाल ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक सवाल के जवाब में ईमेल के जरिए कहा, “हम इन रिपोर्टों से अवगत हैं। एजेंसी के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान में किसी भी परमाणु सुविधा से कोई रेडिएशन रिसाव या लीकेज नहीं हुआ है।” इससे पहले सोशल मीडिया और कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किराना हिल्स को निशाना बनाया गया, जहां कथित रूप से पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का भंडार रखा है।
भारतीय सेना ने भी खारिज किया दावा
इससे पहले भारतीय वायुसेना के डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस, एयर मार्शल ए.के. भारती ने भी इन दावों को सिरे से नकार दिया था। उन्होंने मीडिया से बातचीत में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “धन्यवाद कि आपने हमें बताया कि किराना हिल्स में परमाणु हथियार रखें हैं, हमें इसकी जानकारी नहीं थी। हमने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया।”
विदेश मंत्रालय ने भी मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान इन अफवाहों को खारिज कर दिया। मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हमारी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से पारंपरिक दायरे में थी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी बैठक करेगी, लेकिन बाद में उन रिपोर्टों का खुद पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों ने खंडन किया।” IAEA का यह बयान उन अटकलों को खारिज करता है जिनमें कहा जा रहा था कि रेडिएशन रिसाव के चलते भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम हुआ। कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी इन दावों को मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ावा दिया था।
अमेरिका की चुप्पी
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रधान उप-प्रवक्ता थॉमस पिगॉट से 13 मई को वाशिंगटन डीसी में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि क्या अमेरिका ने पाकिस्तान में रेडिएशन रिसाव की रिपोर्ट्स के बाद कोई टीम भेजी है। इस पर पिगॉट ने कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, “इस समय मेरे पास इस बारे में कुछ भी कहने के लिए नहीं है।” अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की वकालत की।

