मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखें ,किसी भी मजदूर को मानसिक यातना न दें- हारुन मानिकपुरी

छूरिया- विश्व श्रमिक दिवस के अवसर पर श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारी संघ के प्रांत प्रमुख हारुन मानिकपुरी ने अपना विचार रखते कहा कि अनंत मानसिक तनाव जिसे व्यक्त करना शब्दों में संभव नहीं। मजदूरी से शुरु होती है जिंदगी और अंत भी वहीं होता है। आखिर कब तक चलेगा श्रमिकों से ये भेदभाव। एक अमीर व्यक्ति जिनके यहां एक श्रमिक मजदूरी करके अपनी एवं अपने बाल बच्चे,बुढ़ी मां बाप का आजिविका चलाते हैं , वह मालिक उनको अपना गुलाम समझते हैं। मेहनत की राशि देने में भी आनाकानी करते हैं। धिक्कार है ऐसे लोगों को सुबह से रात तक काम लेने के बाद भी श्रमिकों से बुरा बर्ताव करना यह मानवता की निशानी नहीं है। किसी की मजबूरी का फायदा उठाना कहां की इंसानियत है। आखिर एक ही मिट्टी के हम सब पुतले है। एक दिन सब छोड़ मिट्टी में मिल जाना है। श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारी संघ के प्रांत प्रमुख हारुन मानिकपुरी ने शासन ,प्रशासन,समाजसेवियों से आग्रह करते हुए कहा है कि मानवियत संवेदनाओं को जीवित रखकर मजदूर को मानसिक यातना न दें ,मजदूर को मजबूर मत बनाइए आपस में भाईचारे का भाव रखें। मेहनत के बराबर वेतन अवश्य दें कि उसकी आवश्यकता पूरी हो सके यही मजदूर की मनाने की सार्थकता होगी।

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