बांग्लादेश में सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमन ने एक बार फिर चेतावनी जारी है। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले कुछ समय में मुल्क में बड़े आतंकवादी हमले हो सकते हैं। खास बात है कि उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब बांग्लादेश में चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं। साथ ही उन्होंने कानून व्यवस्था भी चरमराने की बात कही है। अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर सवालिया निशान लगते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी ढाका में सेना के वरिष्ठ कमांडर्स से बातचीत में जनरल वकार ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली है कि अगले सप्ताह में आतंकवादी हमले हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने सैन्य अधिकारियों से सतर्क रहने के लिए भी कहा है। हालांकि, इसे लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार या सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
खबर है कि बैठक के दौरान जनरल वकार ने अमेरिका सीनेटर्स के साथ हुई मीटिंग का भी जिक्र किया है। बांग्लादेश में बढ़ते चरमपंथ का मुद्दा भी उठाया गया था। कानून व्यवस्थ को लेकर उन्होंने कहा, ‘चूंकि क्राइम रेट बीते सालों जैसा ही बना हुआ है, अपराधों ने लोगों के बीच डर का माहौल बना दिया है। हमें इन अपराधों पर बात करनी होगी और इन्हें रोकना होगा। कार्रवाई करते समय हमें निर्णायक कदम उठाने होंगे।’
सेना पर उठ रहे सवाल
बांग्लादेश की सेना ने रविवार को एक नवगठित छात्र नेतृत्व वाली पार्टी द्वारा लगाए गए इन आरोपों को खारिज कर दिया कि सेना अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की बहाली की योजना बना रही है। सेना ने इन आरोपों को “हास्यास्पद और मनगढंत कहानियां” बताया।
नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने शनिवार को देश के प्रतिष्ठित ढाका विश्वविद्यालय परिसर में विरोध रैलियां कीं तथा पार्टी को पुनर्स्थापित करने की “सैन्य समर्थित साजिश” को किसी भी कीमत पर विफल करने की कसम खाई।
स्वीडन स्थित बांग्लादेश-केंद्रित समाचार चैनल नेट्रो न्यूज को जारी एक बयान में सैन्य मुख्यालय ने कहा, ‘यह एक राजनीतिक हथकंडे के अलावा और कुछ नहीं था।’

