एक घंटी में मदद पहुँचाने वाले IAS अधिकारी देवेश कुमार ध्रुव

सुकमा.बात बीती रात की है दोरनापाल की एक डेढ़ वर्ष की बच्ची खेलते हुए कैरोसिन पी गई…दोरनापाल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने तत्काल सुकमा रेफर किया…बच्ची के पिता घबराए हुए…. मदद को फोन घुमाते रहे अंततः सुकमा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव को फोन किया गया बताते हैं कलेक्टर ने रात 10 बजे एक रिंग में ही ना सिर्फ़ फोन उठाया बल्की उस बच्ची को बचाने कलेक्टर ने पहले से ही जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीमों को तैयार कर दिया जैसे ही बच्ची जिला अस्पताल पहुंची डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और अब कलेक्टर की इस पहल से डेढ़ वर्ष की बच्ची की तबियत में काफ़ी सुधार है।

सुकमा जैसे नक्सलवाद की जंजीरों से दशकों तक जकड़े जिले में अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को ज़मीन तक पहुँचाने ऐसे ही अधिकारियों की ज़रूरत है।

जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई का निर्णय लिया है तब उन अंदरूनी इलाक़ों के ग्रामीणों में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ाने IAS देवेश कुमार ध्रुव जैसे अधिकारी का होना भी ज़रूरी है। जो रात में भी लोगों की मदद को एक फ़ोन में तैयार रहते हैं।

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